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नहीं इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म

Pradeep Mukherjee

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इंसानियत से बढ़कर
        
                                                    
                            
है नहीं कोई धर्म
या मज़हब
फिर भी न जाने क्यों
धर्म या महज़ब का लेकर
बहाना
या धर्म का नाम लेकर
हैं फैलते
इतना वैमनस्य
इतनी नफरत
समाज में
कुछ सिरफिरे
बनाया है धर्म को
इंसान ने ही
इसलिए हो नहीं सकता धर्म
इंसानियत से बड़ा
लेकिन धर्म के ठेकेदार
रौंद कर इंसानियत को
पैरों तले अपने
मजबूर कर देते
सिसकने को उसे
ऐसे में दोष दें भला
हम किसे?
3 घंटे पहले
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