विज्ञापन

नहीं थकना है तुझे

Prachi Shrivastava

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नहीं थकना है तुझे, कुछ दूर चलकर।
        
                                                    
                            
नहीं रुकना है कुछ-एक मोती समेटकर।।
हथेली पे चांद-तारों का,अंबार होना चाहिए।
छा जा जमीं पर गगन बनकर,
ऐसा तेरा विस्तार होना चाहिए।।

प्रवाह तेरा अविरत नदी सा,
क्यूं बने तू मंद-मंदक।
निश्चय तेरा ऐसा हो,जैसे पांव अंगद।।
स्वप्न के हर एक किले पर,
अब विजय की हुंकार होना चाहिए।
जा भी जहाँ तू छोड़ आ पदचिन्ह अपने,
तेरे जीवन का बस ये सार होना चाहिए।।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
9 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

samarth dalela

4 कविताएं

View Profile