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खामोशी का लिबास

Prabhat Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उन्हें देखकर जब मैं यूँ ही मुस्कुरा दिया,
        
                                                    
                            
जैसे ख़ामोशी के लिबास में
दिल का कोई राज सुना दिया।

न कुछ उन्होंने कहा, न मैंने कुछ बयाँ किया,
बस धड़कनों ने चुपके से, सारा हाल सुना दिया।

वो पास आए तो ठहर गईं ये धड़कनें मेरी,
उनकी नज़रों ने इस दिल को ही ठिकाना बना दिया।

सदियों की प्यास थी इस सूने से दिल में मगर,
उनके एक दीदार ने आज दिल को समंदर बना दिया।

अब और नहीं छुपती ये मोहब्बत दिल की ओट में,
मैंने झुककर उनकी आँखों में अपना जहाँ सजा दिया।

थाम कर हाथ उनका भरी महफ़िल में आज,कह दिया 'तुम ही हो मेरी ज़िंदगी', और सारा ज़माना भुला दिया।
-प्रभात कुमार प्रभात
1 सप्ताह पहले
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