सावन की वर्षा वानी,
सुंदर भावों की वर्षा होये।
तब् साहित्य मनोहारी बनें।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।
सावन की हरियाली वानी
सौंदर्य साहित्य मा झलकें।
तब् साहित्य मनोहारी बनें।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।
बसंत को बहारों वानी,
पोवारी साहित्य फले फूले।
तब् साहित्य मनोहारी बनें ।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।
फूलों की बाग वानी ,
साहित्य मा सौंदर्य दिसे।
तब् साहित्य मनोहारी बनें।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।
श्रृंगारित वधू वानी सुंदर,
सौंदर्य साहित्य मा झलके।
तब् मनोहारी साहित्य बनें।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।
पर्वत को निर्झर वानी,
साहित्य मा करुणा बहें।
तब् साहित्य हृदयस्पर्शी बनें।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।
सागर की लहरों वानी,
संवेदनाओं की लहर उछले।
तब् साहित्य हृदयस्पर्शी बनें।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।
सागर को ज्वार भाटा वानी,
भावों को उतार चढ़ाव रहें।
तब् साहित्य हृदयस्पर्शी बनें,
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।
चांद तारों की रोशनी वानी
जब् साहित्य मा आलोक मिलें।
तब् साहित्य प्रभावशाली बनें,
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।
-ओ सी पटले