आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

साहित्य मा श्रृंगार व करुण रस...

                
                                                         
                            सावन की वर्षा वानी,
                                                                 
                            
सुंदर भावों की वर्षा होये।
तब् साहित्य मनोहारी बनें।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।

सावन की हरियाली वानी
सौंदर्य साहित्य मा झलकें।
तब् साहित्य मनोहारी बनें।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।

बसंत को बहारों वानी,
पोवारी साहित्य फले फूले।
तब् साहित्य मनोहारी बनें ।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।

फूलों की बाग वानी ,
साहित्य मा सौंदर्य दिसे।
तब् साहित्य मनोहारी बनें।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।

श्रृंगारित वधू वानी सुंदर,
सौंदर्य साहित्य मा झलके।
तब् मनोहारी साहित्य बनें।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।

पर्वत को निर्झर वानी,
साहित्य मा करुणा बहें।
तब् साहित्य हृदयस्पर्शी बनें।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।

सागर की लहरों वानी,
संवेदनाओं की लहर उछले।
तब् साहित्य हृदयस्पर्शी बनें।
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।

सागर को ज्वार भाटा वानी,
भावों को उतार चढ़ाव रहें।
तब् साहित्य हृदयस्पर्शी बनें,
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।

चांद तारों की रोशनी वानी
जब् साहित्य मा आलोक मिलें।
तब् साहित्य प्रभावशाली बनें,
अना मातृभाषा को वैभव बढ़ें।।

-ओ सी पटले
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर