विज्ञापन

खो के तुमको दिल मेरा अब तक भी है सहमा हुआ

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पैरों की इन बंदिशों में ख़्वाब हर बिखरा हुआ
        
                                                    
                            
था समेटा तो बहुत लेकिन कहाँ यकजा हुआ

क्या पता था टूट कर ऐसे बिखर जाऊँगी मैं
दर्द से रिश्ता मेरा अब और भी गहरा हुआ

फिर भी यादों से तेरी ही महका रहता है ये दिल
क्यूँ तू ज़ेहन-ओ-क़ल्ब में अब तक भी है ठहरा हुआ

हर नज़ारे में तेरा ही अक्स दिखता है मुझे
है मोहब्बत में तेरी दिल भी मेरा दहका हुआ

अपनी किस्मत में बिछड़ना ही लिखा था क्या करें
खो के तुमको दिल मेरा अब तक भी है सहमा हुआ
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

RATAN KUMAR

787 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10797 कविताएं

View Profile