विज्ञापन

रिश्ते ठहरते हैं कब तक ?

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रिश्ते ठहरते हैं कब तक ?
        
                                                    
                            
जब तक उनकी हाँ में हां मिलाते रहो।
अपनी तरफ से यदि कुछ कह दिया,
तो अब नहीं बनती, बस अब दूर रहो।
सब मनमानी का जमाना है,
कहोगे तो बटोगे, भलाई यही चुप रहो।
-चंद्र दत्त शर्मा
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all