नई नई शादी होने पर,
चार चांद लग जाते हैं,
फिर तुझ सा कोई नहीं,
और तुम सा कोई नहीं
ये वाक्य दोहराए जाते हैं।
कुछ वर्ष ठीक चलता है,
धीरे धीरे मूड बदलता है,
तू तू मैं मैं शुरू हो जाती है,
बात आगे बढ़ जाती है,
जो प्यार पहले पहल था,
अब उससे दूर हो जाते हैं।
आए दिन बात बढ़ती है,
सुलह नहीं हो पाती है,
कहां गए वो पहले दिन?
सब ऐसे क्यों हो जाते हैं?
-चंद्र दत्त शर्मा