आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नई नई शादी होने पर

                
                                                         
                            नई नई शादी होने पर,
                                                                 
                            
चार चांद लग जाते हैं,
फिर तुझ सा कोई नहीं,
और तुम सा कोई नहीं
ये वाक्य दोहराए जाते हैं।
कुछ वर्ष ठीक चलता है,
धीरे धीरे मूड बदलता है,
तू तू मैं मैं शुरू हो जाती है,
बात आगे बढ़ जाती है,
जो प्यार पहले पहल था,
अब उससे दूर हो जाते हैं।
आए दिन बात बढ़ती है,
सुलह नहीं हो पाती है,
कहां गए वो पहले दिन?
सब ऐसे क्यों हो जाते हैं?
-चंद्र दत्त शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर