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मुद्दत हो गए बात हुए, किस्से अधूरे रह गए।

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुद्दत हो गए बात हुए, किस्से अधूरे रह गए।
        
                                                    
                            
याद आए वो लम्हे, ना जाने कहाँ खो गए ?
मैं कहता तुम सुनतीं, तुम कहतीं मैं सुनता,
ना जाने क्यों? उस वक्त अरि पैदा हो गए।
-चंद्र दत्त शर्मा
21 घंटे पहले
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