मुद्दत हो गए बात हुए, किस्से अधूरे रह गए।
याद आए वो लम्हे, ना जाने कहाँ खो गए ?
मैं कहता तुम सुनतीं, तुम कहतीं मैं सुनता,
ना जाने क्यों? उस वक्त अरि पैदा हो गए।
-चंद्र दत्त शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X