विज्ञापन

देख लिया जीकर दूसरों के लिए

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देख लिया जीकर दूसरों के लिए,
        
                                                    
                            
अब हम अपने लिए जी रहे हैं।
उनसे कोई शिकवा ना शिकायत,
पर हम बद्दुआ भी नहीं दे रहे हैं।
-चंद्र दत्त शर्मा
10 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Aditya Mishra

1 कविता

View Profile

Anil Pandey

436 कविताएं

View Profile