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अंतिम सफर

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चल दीं वो अंतिम सफर पर,
        
                                                    
                            
सब कुछ पीछे छोड़ दिया।
रोते बिलखते सब रह गए,
हे प्रभु तूने यह क्या किया?
साथ रहते आदत पड़ गई,
सबको अकेला छोड़ दिया।
ना सोचा कुछ अंतिम बार,
दुख बस गया हमारे हिया।
संसार की रीत है ऐसी,
सदा कोई ना जिया।
-चंद्र दत्त शर्मा
एक घंटा पहले
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