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अब मैंने मान लिया.....

Pandit Chandradutt

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब मैंने मान लिया कि कोई चाहत नहीं,
        
                                                    
                            
निगाहें ढूंढती हैं पर निगाहों में वो बात नहीं।
यह तो पहले पहल की कोई कसक थी,
अब भूल वश भी मिलन की कोई आस नहीं।

- चंद्र दत्त शर्मा
11 घंटे पहले
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