विज्ञापन

पुलवामा हमले पर कविता

Omprakash merotha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करे हम याद शहीदों को , जो अपनी जान गवाते हैं।
        
                                                    
                            
हमेशा रहकर सीमा पे, देश की रक्षा करते हैं।
देश की लाज रखते हैं, अपने प्राणों से ज्यादा
दोनों हाथ जोड़ कर नमन, जवानों को करते हैं।

कोई आ जाए न विपदा, हमेशा डट कर रहते हैं।
चाहे हो बार या त्यौहार, सरहदों पर मनाते हैं।
जो देते हैं हमें ख़ुशियां, सारी सरहदों पर से
अपना सर्वोच्च ही तो वह तिरंगा मान लेते हैं।

ओमप्रकाश मेरोठा हाड़ौती कवि

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile