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मेरे अल्फाज़

पुलवामा हमले पर कविता

Omprakash merotha

41 कविताएं

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करे हम याद शहीदों को , जो अपनी जान गवाते हैं।
हमेशा रहकर सीमा पे, देश की रक्षा करते हैं।
देश की लाज रखते हैं, अपने प्राणों से ज्यादा
दोनों हाथ जोड़ कर नमन, जवानों को करते हैं।

कोई आ जाए न विपदा, हमेशा डट कर रहते हैं।
चाहे हो बार या त्यौहार, सरहदों पर मनाते हैं।
जो देते हैं हमें ख़ुशियां, सारी सरहदों पर से
अपना सर्वोच्च ही तो वह तिरंगा मान लेते हैं।

ओमप्रकाश मेरोठा हाड़ौती कवि

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