नववर्ष तुम्हारा स्वागत है।
गुल्लक खुशीयों से भर जाए
यह मनोगत है ।
धवल गंगा की धरा
शुद्धता के साथ बहती
पावनता की शिखर है
विकास की धारा निरंतर बहे ।
मनोरथ , विश्व का कल्याण हो
मां भारती के कण कण में गुंजता
यह गुंजन साकार हो ।
ऐसे मनोरथ विश्व में अकेले भारत से
योग वेद उपनिषद
विश्व के आधार हो ।
आओ नववर्ष स्वागत है
नववर्ष तुम्हारा स्वागत है।