आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नववर्ष स्वागत है

                
                                                         
                            नववर्ष तुम्हारा स्वागत है।
                                                                 
                            
गुल्लक खुशीयों से भर जाए
यह मनोगत है ।
धवल गंगा की धरा
शुद्धता के साथ बहती
पावनता की शिखर है
विकास की धारा निरंतर बहे ।
मनोरथ , विश्व का कल्याण हो
मां भारती के कण कण में गुंजता
यह गुंजन साकार हो ।
ऐसे मनोरथ विश्व में अकेले भारत से
योग वेद उपनिषद
विश्व के आधार हो ।
आओ नववर्ष स्वागत है
नववर्ष तुम्हारा स्वागत है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर