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घुंघट में चांद

Omprakash Bajaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चांद में दाग़ देखोगे क्या फायदा
        
                                                    
                            
चांदनी का ये झरना रुकेगा नही
द्वार देहरी को, हमने सजा है दीया
सज गई टिमटिमाती, सभी सुक्तियां
आ भी जाओ क्या सुरज ढलेगा नहीं ।।
कर लो कितने ही जपतप आराधना
चाहिए एक विश्वास की बुंद भर
जो पा जाओ विश्वास की बुंद तुम
मत रुको चल पडो ,विश्वास की है डगर
पी का शिव से मिलन फिर रूकेगा नहीं ।।
ले चलो - स्वर चलें, अनहद के अनंत में
स्वरलहरियों से गुंजेगी, अंतरीक्ष की हर दिशा
चमकेगी बिजलियां,अनहद के सामने
मधुर तरंगों का बहना रूकेगा नहीं
अनंत के परम से ,संत सनेही मिलेंगे यहीं।।
मान जाओ के बैठो उठाओ पलक
क्या पलकों का नयन द्वार खुलेगा नहीं
लौ को मध्यम करो,हटाऊं घुंघट जरा
हो जाय एक, ये आकाश ओर ये धरा
मिलन चांद का चांदनी से रुकेगा नहीं।।

ओम बजाज
 
3 वर्ष पहले
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