विज्ञापन

आओ समंदर

Omprakash Bajaj

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्या सच है
        
                                                    
                            
ईश्वर बसा है हर दिल के भीतर
बन के दिगंबर बन के सिकंदर ।
खुला दिख रहा है बर्बादी का मंजर
फिर भी
बांटें जा रहे हैं खंजरों पे खंजर।
फीकी मुस्कान संग ज्वाला है अंदर
नाप लो धरती आओ समंदर ।
नाप लो धरती आओ समंदर ।
3 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12437 कविताएं

View Profile