क्या सच है
ईश्वर बसा है हर दिल के भीतर
बन के दिगंबर बन के सिकंदर ।
खुला दिख रहा है बर्बादी का मंजर
फिर भी
बांटें जा रहे हैं खंजरों पे खंजर।
फीकी मुस्कान संग ज्वाला है अंदर
नाप लो धरती आओ समंदर ।
नाप लो धरती आओ समंदर ।
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