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समय की आदत सी है

Nivedita Roy

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हवा के पंख लगा कर उड़ जाता है
        
                                                    
                            
समय को उड़ने की आदत सी है

हमारी तक़दीर बदल जाता है
समय को बदलने की आदत सी है

कुछ रिश्ते बनते और बिगड़ जाते हैं
समय को बनाने -बिगड़ने की आदत सी है

हम चाह के भी रोक नहीं पाते
समय को बीतने की आदत सी है

दिल के ज़ख़्मों को इंतज़ार रहता है
समय को मरहम लगाने की आदत सी है

मुट्ठी में क़ैद कर लेना चाहती हूँ
पर समय को फिसल जाने की आदत सी है !

निवेदिता रॉय 
 
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