विज्ञापन

कुछ अपूर्ण सा लगता है

Nishant Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ अपूर्ण सा लगता है
        
                                                    
                            
जब चिर-स्थायी एकांत में,
बैठे हो बिल्कुल शांत में,
जब खोई स्मृति क्लांत में,
जब उगता सूरज ढलता है,
कुछ अपूर्ण सा लगता है।
जब कर्मों का न मिले परिणाम,
एक पल का भी न मिले विराम,
अंतर्मन में मचे कोहराम,
जब प्रश्न तुम्हारी क्षमता पर हो,
कुछ अपूर्ण सा लगता है।
जब प्रेम को अपमान मिले,
हर कार्य में व्यवधान मिले,
जब अयोग्यों को सम्मान मिले,
जब विस्तृत सागर कुछ कहता है,
कुछ अपूर्ण सा लगता है।
7 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12683 कविताएं

View Profile