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आज की नारी

Nirmala Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नहीं चाहिए तुम्हें मुरझाए फूलों की माला
        
                                                    
                            
तुम जीवित कांटों पर चलकर खुश रहो
नहीं बना है तुम्हें जीवित मुर्दा
तुम खंजीत लहूलुहान खुश रहो
नहीं बना है तुम्हें किसी के विचारों की मूक मूर्ति
तुम कर्कश ही सही
पर अपनी आवाज में खुश रहो
लहजे, लफ्जों, मर्यादा, सभ्यता ,संस्कार
सब में तुम अद्वितीय हो
बस स्वतंत्र देश में
तुम अपने से ज्यादा दूसरों की परतंत्र हो
अगर ढूंढ लो अपने अंतर मन को
तो तुम सब पर भारी हो
आखिरकार तुम आज की नारी हो
एक वर्ष पहले
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