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नारी वैशाखी लेना छोड़ दें

Nirmal Thakur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उठ खड़ा हो जा नारी
        
                                                    
                            
छोड़ सहारा बैसाखी
तुम्हारी बेला आई
रवि ने अपनी अरनिमा क्षितिज में बरसाए ।
निकलो मुर्गी के अंडे से
देखो सुंदर छाती सृष्टि के
तोड़ दो सारे बंधन को
तोड़ सारे रस्मे तोड़ दो सारे कसमों को ।
निकल पड़ो तुम जग के भ्रमण
डर मत मदिरा बैसाखी से
छोड़ दो तुम इन्हें पीछे
निकल पड़ो तुम तीव्र से
नाप लो तुम सृष्टि तीन डग में ।
चंडी के रूप में नृत्य कर पिक गान गा
प्याला भर विष पी ले
तांडव नाच भी नाच ले
मनचाहे क्रीड़ा कर ले इस भुवन में
तुम्हारी बेला आई
उठ खड़ा हो जा नारी
छोड़ सहारा वैशाखी ॥
नारी नैन पाद दो कर है तेरे
तुम क्यों होती हो बेसहारे
तुम पांच तत्वों से निर्मित
पांच तत्व से निर्मित है वैशाखी पुरुष
फिर वैशाखी का क्या काम
बिछा दो सृष्टि में अपने जलवे का जाल ।
दिखाओ अपनी दुर्गा की रूप
ना रहो तुम मर्दों से पीछे
छू लो तुम नभ को अपनी जिद से
बंध मत रस्मों रिवाजों से
तोड़ दो सारे बंधन को
हो जा तू उन्मुक्त
नभचर की भाँति नभ में विचरण करो
मीन की भाँति जलनिधि करो
तुम ना रहो किसी से कम
वर्तमान में कर दिखाओ
असंभव को संभव हरदम
उठ खड़ा हो जा नारी
छोड़ सहारा वैशाखी ॥
नारी कभी किसी से कम नहीं
मत कर देती है उन वैशाखी पुरुषों को ।
सतयुग की रही बात
नारियों ने अपनी महत्व पर वर्चस्व जमाया
देवी सीता ने दुष्ट रावण को मरवाई
दुर्गा ने अपनी महत्व पर प्रकाश डाली
महिषासुर अत्याचारी निशाचर को मार डाली
कलयुग मैं झांसी की रानी ना रही पीछे
अंग्रेजों का खून पीकर प्यास बुझाई '
कल्पना सुनीता विलियम्स ना रही कम
जाकर चाँद पर हक जमाई
वो सव छोड़ वर्तमान में ही देख
भारत की बहदुर बिटिया
शिवांगी सिंह मिग-21 उड़ाई '
नारी जागो तुम्हारी बेला आई
उठ खड़ा हो जा नारी
छोड़ सहारा बैसाखी ॥

( रेखा भारती - निर्मल ठाकुर )
(बनासो हजारीबाग झारखण्ड )

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