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मोबाइल की लत लगी ...

Nirmal Thakur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मोबाइल की लत लगी
        
                                                    
                            
आंखों की नींद उड़ी
कानों की छुट्टी पसीना
मोबाइल छेड़ छेड़ कर
तर्जनी घिसी ऊंगली हुई बौना
रात दिन जब भी खोलें
मोबाइल उठकर बोले
कभी थका हारा ना
सवाल जवाब जितना करें
सेकेंड में हल करें
जन जन के घट घट में
मोबाइल बोले अपना बोली
सोशल मीडिया में पोल खोले
दूरदर्शन में समाचार आने से पहले
मोबाइल में सोशल मीडिया बवाल बोले ।
मोबाइल की लत लगी
हठ बढ़ी बच्चों की
दूध पिलाना है तो मोबाइल दिखाओ
खाना खिलाना है तो अम्मा कार्टून लगाओ
मोबाइल बना जीवन का हिस्सा
पूरे दुनिया में चल रही है इसकी किस्सा
नौजवान के हाथ से मोबाइल छुटती नहीं
बिजनेसमैन की कान घिसती नहीं
बुढ़ापे के मुंह से लार टपके
मोबाइल आया जीवन साथी बन के
पूरी दुनिया मोबाइल की आदि हुए
चिट्ठी पत्री गुम हुई
गीता रामायण के पुस्तकों में दीमक लगी
पुस्तकालय घर में ताला जड़ी
शिक्षक सब यूट्यूब में खेले
बच्चा सब ऑनलाइन बोले
किताबों में लिखा सब मोबाइल में मिले
क्यों दिमाग किताब को झेले
सारी दुनिया जो ऑनलाइन से खेले । ॥

(रेखा भारती -निर्मल ठाकुर)
(बनासो हजारीबाग झारखण्ड )
 
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