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बिहार की अस्मिता - नवयुग का संकल्प

NILESH NISHAKAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं बिहार का बेटा हूँ, गर्व से ये कहता हूँ,
        
                                                    
                            
मिट्टी के कण-कण में, मैं इतिहास को देखता हूँ।
यह वही धरा है जहाँ, ज्ञान का सूर्य उदित हुआ,
नालंदा की प्रज्ञा से, विश्व आलोकित हुआ।
विक्रमशिला की तप-धारा, चेतना को जगाती है,
बुद्ध का उपदेश जग को, मुक्ति पथ दिखाती है।
यह महावीर का तपोबल है, चाणक्य की नीति उजास,
आर्यभट्ट की गणना में, विज्ञान का स्वर्णिम प्रकाश।
विद्यापति की वाणी में अनुराग अपार,
रेणु की लेखनी में ग्राम्य जीवन साकार।
यह हिंदी की प्राण-धारा है, यह जन-मन का प्रदेश,
हर स्वर में गूँज रहा संस्कृति का अमर संदेश।
यहां छठ की अरुणिमा में है, आस्था का विस्तार,
मधुबनी की रेखाओं में है, लोकजीवन साक्षात्कार।
पर यहां हमने अंधकार भी देखा, वेदना भी सही,
बाढ़, अभाव, बेरोज़गारी की यातना भी झेली।
जब बेरोज़गारी की पीड़ा से, बेटा पलायन कर गया,
माँ की आँखों का सपना चौखट पर रह गया।
यहां जाति की दीवारों ने समाज को टुकड़ो में बाँट दिया,
राजनीति की आँधी ने सच का गला काट दिया।
किन्तु इतिहास गवाह है, बिहार कभी झुका नहीं,
संघर्षों की ज्वाला में, तपकर भी रुका नहीं।
अब शिक्षा-नीति की ज्योति से नवप्रभात हुआ है,
हर स्कूल की घंटी से, बिहार का भविष्य जुड़ा है।
अब कौशल, तकनीक, नवाचार से, बदल रहा परिवेश,
परम्परा संग आधुनिकता का मिल रहा संदेश।
इतिहास की ज्योति को आगे ले जाने का संदेश,
बिहार की अस्मिता का स्वर लिख रहा निलेश।
6 महीने पहले
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