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न जाने कहाँ खो गया ।

NIHALIKA K

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रास्ते में चलते हुए
        
                                                    
                            
गम से मुलाकात हो गई,
बीती - पुरानी यादें
फिर से ताजा हो गई ।

बिना किसी स्वार्थ के
एक - दूसरे का साथ था,
आँखों से ओझल फिर भी
ख्वाबों में पास था ।

ख्यालों में डूबती गई
वक्त गुजरता गया,
गमों की बारिश
रूह को भिगोता गया ।

आँखों में नमी
दिल भर आया,
जो सिर्फ मेरा था
न जाने कहाँ खो गया ।
9 घंटे पहले
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