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कविता : रात का निमंत्रण....

Netra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कविता : रात का निमंत्रण....
        
                                                    
                            
प्रिय तुम्हारे लिए सारी
रात दरवाजा खोला था
कैसे भी करके तुम को मैंने
रात में आने को बोला था

तुम हो कि अभी
सुबह को आ रही हो
अपनी वो शक्ल
क्यों मुझे दिखा रही हो ?

न इस बख्त तुम्हारे
गालों को चूम सकता
न तो फिर तुम्हारे
बाहों में झूम सकता

अगर मैं तुम्हारे
गालों को चूमु तो
अगर मैं तुम्हारे
बाहों में झुमु तो

आस पास के लोग
क्या कहेंगे ?
अरे पगली वे थोड़ी
चुप रहेंगे ?
अरे पगली वे थोड़ी
चुप रहेंगे ..........

 
10 घंटे पहले
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