कविता : पैर...
जितनी थी अपनी सारी की सारी
खुशियां, लोगों में बांट दिया
तब भी लोग पैर काटने लगे फिर
हमने पैर ही काट दिया
तब भी लोग पैर काटने लगे फिर
हमने पैर ही काट दिया.......