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कविता : आलू....

Netra Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कविता : आलू....
        
                                                    
                            
आलू की सब्जी वैसे
सदाबहार है
आलू के बगैर कोई भी
सब्जी बेकार है

हर कहीं आलू को हर
कोई अच्छा मानता है
आलू मटर या आलू व्यंग्न
बड़ा अच्छा बनता है

गांव शहर हर सभी के घर घर में
गेहूं का आटा
उस पे भरके और अच्छा बनता
आलू का परांठा

आलू के चिप्स से ले कर न
जाने क्या क्या बन जाते हैं
हर देश के लोग चाव के
साथ आलू को ही खाते हैं
हर देश के लोग चाव के
साथ आलू को ही खाते हैं.......

 
एक घंटा पहले
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