स्वर्ग सी सुन्दर बेटियाँ।
जब घर में, बेटियाँ खिलखिलाती है।
तो घर में सुकून की खुशबू आती है।
जब वो हँसती है
तो, दिल की कलियाँ खिल जाती है।
जब
वो घर से बाहर कहीं चली जाती हैं।
तो घर आँगन व दीवारें
खिड़कियाँ भी निराश नजर आती है।
और जब वो बाहर से घर में आती है
तो घर में सारी खुशियाँ छा जाती है।
जब वो पास की
गली, मोहल्ले में खेलने को जाती है।
तो
शिकायतों का अम्बार लेके आती है।
पर वो शिकायतें भी उनकी मीठी
मुस्कानों से, रफा दफा हो जाती हैं।
जब वे घर के काम में लग जाती हैं।
तो तितली सी फुर्ती सी
फुर फुर सारे काम चट कर जाती हैं।
जब वो पढ़ने लग जाती हैं
तो स्कूल में वो नंबर वन पे आती हैं।
जब वे साइकिल गाड़ियाँ चलाती हैं।
तो आकाश में
वो उड़ती परियों सी, नजर आती हैं।
जब
वो पढ़ लिख कर कुछ बन जाती हैं।
तो माँ बाप घर गाँव
देश का वो नाम रोशन कर जाती हैं।
फिर बिना बेटियों के तो स्वर्ग
की सुन्दरता भी अधूरी रह जाती हैं।