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सरहद पर मेरे देश का जवान खड़ा हैं।

Nema Ram

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सरहद पर मेरे देश का जवान खड़ा हैं।
        
                                                    
                            

कह दो उन सरहदी
हवाओं से, वो जरा सावधान हो जाए।
सरहद पर मेरे देश का जवान खड़ा हैं।
वो
सरहद पर कोई शरारत करना छोड़ दे।
और रुख
वो अपना किसी और दिशा में मोड़ दे।
उसकी
बाज सी निगाहे है और शेरे सी बाहें है।
हाथ में उसके गन हैं, सिर पे कफ़न हैं।
शत्रु
को करता वो सीधा जमीन में दफन हैं।
बारूद से वो खेलता है।
मगर, दुश्मन को मिट्टी में वो पेलता हैं।
कलेजा उसका सवा सेर हैं।
और शत्रु को करता वो मिट्टी में ढेर हैं।
सरहद पर मेरे देश का जवान खड़ा हैं।
वो, पहले शत्रु को भी हाथ जोड़ता हैं।
फिर उसको जय हिन्द बोलता हैं और
उसके बाद वो, उसका भ्रम तोड़ता है।
कह दो उन सरहदी
हवाओं से, वो जरा सावधान हो जाए।
सरहद पर मेरे देश का जवान खड़ा है।
 
एक दिन पहले
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