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ऐतबार

Neha Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो कहना चाहते हैं कभी तो समझा करो
        
                                                    
                            
मेरी मोह्ब्बत पर कभी तो ऐतबार करो
ना समझ नही हो तुम ऐ दिल-ए-वफ़ा
चाहत का कारोबार बना के रखते हो तुम
खिलौने की तरह मुझको ना आज़माया करो
चाहत की परख इतनी ही रखते हो तुम
कभी तो अहसासों का कारवां बनाया करो
मुक़म्मल चाहतों का घरौंदा सजा रखा है
मेरी दहलीज़ पर कभी तो लौट के आया करो
यहां जश्न-ए-जिंदगी का हर पन्ना कोरा है
कभी तो मेरी नज़र से नज़र मिलाया करो।।


नेहा यादव
लखनऊ उत्तरप्रदेश


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6 वर्ष पहले
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