वो कहता है तुमसे मोहब्बत करता हूं,
फिर भी जाने क्यों कटा कटा सा रहता है।
हाल मै आपबीतीसुनाऊं वो अनसुना करता हैं,
भावनाओं को वो मुझसे जोड़ना नहीं चाहता।
कितना खास हैं वो मेरे लिए सोचना नहीं चाहता,
नाराजगियों को मेरे वो अपने सिर का भार समझता है।
फिर भी पता नहीं क्यों उसको लगता हैं,
वो मुझसे मोहब्बत बेशुमार करता हैं।।।।।......
मेरी कविताओं को वो पढ़ना नहीं चाहता,
मेरी कहानियों का हिस्सा वो रहना नहीं चाहता।
मेरी छोटी छोटी बेतुकी बातों को,
वो हर बार नजरअंदाज करता हैं।
फिर भी न जाने क्यों उसको लगता हैं,
वो मुझसे मोहब्बत बेशुमार करता हैं।।।।।।......
वो पढ़ना नहीं चाहता नक्शों को मेरे,
वो सुनना नहीं चाहता लब्जो को मेरे।
उसे मेरा गलतियों पर टोकना बड़ा खराब लगता हैं,
मेरी चिंता उसके लिए करना बकवास लगता हैं।
मैं लडू अगर बुरी आदतों पर उसके,
मेरा उससे लड़ना अपराध लगता हैं।
फिर भी न जाने क्यों उसको लगता हैं,
वो मुझसे मोहब्बत बेशुमार करता हैं।।।।।।.......