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छोड़ दूंगी इस जग के सारे झूठे रिश्ते

Neetu Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            थक गई रोज मरते मरते मुझे भी वो
        
                                                    
                            
एक दिन जीना हैजब कोई मेरे नखरे
उठाए अपने हाथों नहलाए नए कपड़े
पहना कर मुझे सजाए।

फिर फूलों की सेज सजाए
अपने हाथों से लिटाए फिर चार लोग
मुझे काँधे का झूला झूलते हुए
मुझे मेरी मंजिल तक पहुंचाए।

ओर हर कोई मेरी बुराई में भी
अच्छाई ढूंढ के मेरे लिए रोए
उस दिन अब सच होगा
राम नाम सत्य का सही अर्थ समझूंगी।

छोड़ दूंगी इस जग के सारे झूठे रिश्ते
वो एक दिन सच्चा होगा अच्छा होगा
मुझे भी वो एक दिन जीना है।

 
एक दिन पहले
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