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अधूरी जंग

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं खींच कर गरीबी को गुज़ारे पर ले आता
        
                                                    
                            
समेट कर सारे आसमां को तारे पर ले आता

बस वक्त ने ही रुख बदल दिया हवाओं का
मैं डूब कर भी कश्ती किनारे पर ले आता

मेरा भाग्य ही मेरे सामने अड़ कर खड़ा है
यक़ीन मानो मैं जिंदगी को नज़ारे पर ले आता

मेरी पीठ में खंज़र मेरे अपनों का ही था
मैं हार कर भी जीत को दुआरे पर ले आता
-नीटू मावी
3 घंटे पहले
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