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ए जिंदगी

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किसी ने उम्र भर कभी छाव नहीं देखा
        
                                                    
                            
दरिया कूद कर पर किया है नाव नहीं देखा

हमने खुली आँखों से दुनिया देखी है मावी
यक़ीन मानो हमने कोई ख्वाब नहीं देखा

बिना रुके चलते रहे मिलों तक पथ पर
रिसते हुए पांवों में कभी घाव नहीं देखा

वक्त ने एक रोज़ घर से ऐसे निकला हमें
फिर कभी लौटकर हमने गाँव नहीं देखा
-नीटू मावी
एक घंटा पहले
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