विज्ञापन

एक कवि

Neeraj gujjar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं कवि नित कोरे कागज पर,
        
                                                    
                            
संसार रचता हूं
विशाल जगत संपूर्ण माया को
सूक्ष्म कर देता हूं।
कर तन मन धन को,
कल्पना के हवाले,
यू स्वतंत्र गगन की सैर करता हूं।।
है किया स्पर्श ममता को जिसने,
मैं वही कलमदार हूं,
पहुंच ना सका जहां रवि
मेरा वही ठिकाना है,
मैं घोर समर के मैदानों में,
संगीत सुर ताल रचता हूं।।
रचता हूं सीमित कागज पर,
असीमित प्लावित जग की माया,
रेगिस्तान की धूप में वृक्षों की,
शीतल छाया
मैं गृहस्थ जीवन में सन्यास रचता हूं।।
रंगता है श्वेत बेरस कागज को
सुख जीवन के रागों से
मैं वही रंगरेज हूं ।
है दर्शन शक्ति असीमित,
जिसकी कल्पना भी,
असीमित,
मैं वह कवि हुं।।

 
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Adv DK Kanojiya

71 कविताएं

View Profile

Suresh Kumar

579 कविताएं

View Profile