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नवरात्रि

प्रणव भास्कर

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            "नवरात्रि"
        
                                                    
                            

नव उत्सव नव रात्रि पावन,
त्यौहार अभिराम सिंहवाहिनी।

हे शैलपुत्री हे गिरिजा पार्वती,
कोटि कोटि प्रणाम सिंहवाहिनी।।

महातपा ब्रह्मचारिणी अनूपा,
बिखेरो मुसकान सिंहवाहिनी।

शरदेन्दु गात मातु चंद्रघंटा,
दीजे अथाह ज्ञान सिंहवाहिनी।।

सुंदर अष्टभुजा मातु कुष्माण्डा,
दीजे खुशी अपार सिंहवाहिनी।

हे स्कंद माता हे विनायक माता,
दीजे मुझे दुलार सिंहवाहिनी।।

शत्रुहंता हे जननी कात्यायनी,
कीजे मुझे अभय सिंहवाहिनी।

रक्तबीज संहारिणी मातु काली,
सदा आपकी जय सिंहवाहिनी।।

हे जगत जननी हे मातु गौरी,
हे शंभु पटरानी सिंहवाहिनी।

शिववीर सुत तेरो सिद्धिदात्री,
दीजे सिद्धि भवानी सिंहवाहिनी।।


प्रणव भास्कर तिवारी शिववीर
पूरे ब्राह्मण, महुलारा राम सनेही घाट बाराबंकी
 उत्तर प्रदेश

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