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नस्ल ओ कौल

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वज़न आदमी का हर-सू हर-सम्त चलता नहीं पता तराजू के तौल से
        
                                                    
                            
अक्लमंद का चले पता मौन से होती मूर्ख की पहचान उसके बोल से!
शक्ल-ओ-सूरत लिबास और भेष बतला नहीं सकते परिवेश किसी का
कद- ओ- किरदार की होती है पहचान इन्सान के नस्ल- ओ- कौल से!
-एन. आर. कस्वाँ
 
7 घंटे पहले
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