वज़न आदमी का हर-सू हर-सम्त चलता नहीं पता तराजू के तौल से
अक्लमंद का चले पता मौन से होती मूर्ख की पहचान उसके बोल से!
शक्ल-ओ-सूरत लिबास और भेष बतला नहीं सकते परिवेश किसी का
कद- ओ- किरदार की होती है पहचान इन्सान के नस्ल- ओ- कौल से!
-एन. आर. कस्वाँ
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