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मुस्तक़बिल

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गुज़रे वक़्त पर गौर करने की बजाए
        
                                                    
                            
तवज्जोह अपने मुस्तक़बिल को दी जाए

माज़ी को जैसा जीना था जी चुके हो
क्यूँ न आनेवाले कल की फ़िक्र की जाए
-एन आर कस्वाँ
12 घंटे पहले
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