गुज़रे वक़्त पर गौर करने की बजाए
तवज्जोह अपने मुस्तक़बिल को दी जाए
माज़ी को जैसा जीना था जी चुके हो
क्यूँ न आनेवाले कल की फ़िक्र की जाए
-एन आर कस्वाँ
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