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मैं घोर आशावादी हूँ

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मैं घोर आशावादी हूँ
        
                                                    
                            
निराशा को कभी
पास नहीं फटकने देता
मेरी उम्मीदों की ढाल से
टकराकर लौट जाती हैं
गर कभी मायूसियां
मेरी ओर आती है
आरजू की गहरी वादियों में
सौंधी पवन सरसराती है
बारिश के पानी में
महकने लगती है मिट्टी
और कच्ची कलियां मुस्कुराती है
आशाएं पुष्पित पल्लवित होकर
मन उपवन में खिलखिलाती है
#बशर
3 वर्ष पहले
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