अश्कों से पूछा कहां से लाते हो तुम पानी इतना
अश्कों ने कहां बहाते हो जो तुम पसीना इतना
पसीने से पूछा कहां से लाते हो तुम पानी इतना
पसीने ने कहां जलाते हो तुम खुद का खून जितना
चेहरे की मुस्कुराहट तब रूठ कर बोली मुझ से
मुझे भी तो पूछो कैसे छुपाती हूं ग़म मैं कितना
ग़मों से पूछा मैने कहां से तुम चले आते हो भाई
ग़मों ने कहां तुम्हारी चाहतों की करतूत हैं ये भाई
चाहतों से कहां क्यों मुश्किलों में डालते हो जिंदगी मेरी
चाहतों ने कहां हम तो हैं जिंदगी की खूबसूरती न्यारी
हमारे बिना जिंदगी तुम्हारी जिंदगी भी नहीं होती
ये अश्कों की बारातें ये मुस्कुराहटें जो नहीं होती
-नंदकुमार भागवत