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जिंदगी की खूबसूरती

Nandkumar Bhagwat

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अश्कों से पूछा कहां से लाते हो तुम पानी इतना
        
                                                    
                            
अश्कों ने कहां बहाते हो जो तुम पसीना इतना

पसीने से पूछा कहां से लाते हो तुम पानी इतना
पसीने ने कहां जलाते हो तुम खुद का खून जितना

चेहरे की मुस्कुराहट तब रूठ कर बोली मुझ से
मुझे भी तो पूछो कैसे छुपाती हूं ग़म मैं  कितना

ग़मों से पूछा मैने कहां से तुम चले आते हो भाई
ग़मों ने कहां तुम्हारी चाहतों की करतूत हैं ये भाई

चाहतों से कहां क्यों मुश्किलों में डालते हो जिंदगी मेरी
चाहतों ने कहां हम तो हैं जिंदगी की खूबसूरती न्यारी

हमारे बिना जिंदगी तुम्हारी जिंदगी भी नहीं होती
ये अश्कों की बारातें ये मुस्कुराहटें जो नहीं होती
-नंदकुमार भागवत
8 महीने पहले
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