आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जिंदगी की खूबसूरती

                
                                                         
                            अश्कों से पूछा कहां से लाते हो तुम पानी इतना
                                                                 
                            
अश्कों ने कहां बहाते हो जो तुम पसीना इतना

पसीने से पूछा कहां से लाते हो तुम पानी इतना
पसीने ने कहां जलाते हो तुम खुद का खून जितना

चेहरे की मुस्कुराहट तब रूठ कर बोली मुझ से
मुझे भी तो पूछो कैसे छुपाती हूं ग़म मैं  कितना

ग़मों से पूछा मैने कहां से तुम चले आते हो भाई
ग़मों ने कहां तुम्हारी चाहतों की करतूत हैं ये भाई

चाहतों से कहां क्यों मुश्किलों में डालते हो जिंदगी मेरी
चाहतों ने कहां हम तो हैं जिंदगी की खूबसूरती न्यारी

हमारे बिना जिंदगी तुम्हारी जिंदगी भी नहीं होती
ये अश्कों की बारातें ये मुस्कुराहटें जो नहीं होती
-नंदकुमार भागवत
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर