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बेजुबान

Naik prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पता नहीं क्यों मैं पत्नि के सामने बेजुबान हो जाता हूं
        
                                                    
                            
बड़े कवि सम्मेलन में भी बेधड़क कविता बोल जाता हूं
दोस्तों के साथ आत्मविश्वास के साथ बहस कर जाता हूं
संगोष्ठी प्रतियोगिता में अक्सर प्रथम पुरस्कार पा जाता हूं
आज सुबह की बात ही ले लीजिए रविवार का दिन था सुबह सात जब मैं गहरी नींद में था, पत्नि ने उठा दिया था
पत्नि बोली कि उठो पतिदेव आज बहुत सारे काम हैं
मैने बोला कि एक घंटा सोने दो उठ कर सब काम कर दूंगा
नहीं नहीं अभी उठना पड़ेगा, वरना बकरी बना दूगी
फिर दिन भर में- में-में करते रहना
मैं तत्काल उठकर बाॅथरुम तरफ भाग कर गया
जब मैं वापस आया, पत्नि ने गरम चाय किया स्वागत
दिल खुश कर दिए पत्नि ने बिस्कुट और चाय से स्वागत
मैं कितना गौरवान्वित हूं कि पत्नि मेरी बहुत अच्छी है
ऊपर से नारियल जैसा सख्त अंदर से ऊपर से गरम
दोनों बच्चों को नाजो से पाल रही है, क्यों बनूं बेजुबान
पत्नि बहुत प्यारी ,ममतामयी सुघ्घड़ है वही तो मेरी शान
हर समय, हर पल, बारहों महिने बने रहूं बेजुबान
एक महीने पहले
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