पता नहीं क्यों मैं पत्नि के सामने बेजुबान हो जाता हूं
बड़े कवि सम्मेलन में भी बेधड़क कविता बोल जाता हूं
दोस्तों के साथ आत्मविश्वास के साथ बहस कर जाता हूं
संगोष्ठी प्रतियोगिता में अक्सर प्रथम पुरस्कार पा जाता हूं
आज सुबह की बात ही ले लीजिए रविवार का दिन था सुबह सात जब मैं गहरी नींद में था, पत्नि ने उठा दिया था
पत्नि बोली कि उठो पतिदेव आज बहुत सारे काम हैं
मैने बोला कि एक घंटा सोने दो उठ कर सब काम कर दूंगा
नहीं नहीं अभी उठना पड़ेगा, वरना बकरी बना दूगी
फिर दिन भर में- में-में करते रहना
मैं तत्काल उठकर बाॅथरुम तरफ भाग कर गया
जब मैं वापस आया, पत्नि ने गरम चाय किया स्वागत
दिल खुश कर दिए पत्नि ने बिस्कुट और चाय से स्वागत
मैं कितना गौरवान्वित हूं कि पत्नि मेरी बहुत अच्छी है
ऊपर से नारियल जैसा सख्त अंदर से ऊपर से गरम
दोनों बच्चों को नाजो से पाल रही है, क्यों बनूं बेजुबान
पत्नि बहुत प्यारी ,ममतामयी सुघ्घड़ है वही तो मेरी शान
हर समय, हर पल, बारहों महिने बने रहूं बेजुबान
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