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जैसे मेरा कोई कर्ज़ देना बाकी था

Muskaan's Gyan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कर्ज़
        
                                                    
                            
दूर से जो चमकते हो तुम
मेरे साथ रहना ना तुम्हें राज़ी था
बिछड़ने की सजा यूँ मिली मुझे
जैसे मेरा कोई कर्ज़ देना बाकी था

खुशियाँ ढूंढ रहे थे हम
पर खुदा कहाँ राजी था,
दर्द आए इसे जहाँ में
जैसे मेरा कोई कर्ज़ देना बाकी था

शिकायत भी ना कर सके हम
क्योंकि खुदा ही काज़ी था
अकेला छोङ गए तुम मुझे यहाँ,
जैसे मेरा कोई कर्ज देना बाकी था
एक दिन पहले
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Dn Chaubey

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